किसे पता था ?
किसे पता था , ऐसा कुछ हो जाएगा , कोई अजनबी यूँ दिल के क़रीब आएगा , रुके से कदम फिर चल पड़ेगें , बेजान रास्ते फ़िर महक उठेंगें , कभी थे अजनबी - अनजान , जैसे दो बर्फ़ीले पहाड़ , खड़े हों मुँह फेरे , प्रेम की आँच से पिघले दो शिलाखंड , बन हवा महके उपवन दर उपवन , हवाएँ कभी इतनी ख़ुशनुमा न थी , किसे पता था , ऐसा कुछ हो जाएगा , रोशन रोशन सारा जहाँ हो जाएगा , छोटा सा जुगनू सूरज बन जाएगा , फूल खिलेंगें दिल में ही नही , राहों में आशा बन कोई बहार सी नई लाएगा , कोई आएगा और दिल ...