संदेश

सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किसे पता था ?

  किसे   पता   था , ऐसा   कुछ   हो   जाएगा , कोई   अजनबी   यूँ   दिल   के   क़रीब   आएगा , रुके   से   कदम   फिर   चल   पड़ेगें , बेजान   रास्ते   फ़िर   महक   उठेंगें , कभी   थे   अजनबी - अनजान , जैसे   दो   बर्फ़ीले   पहाड़ , खड़े   हों   मुँह   फेरे , प्रेम   की   आँच   से   पिघले   दो   शिलाखंड , बन   हवा   महके   उपवन   दर   उपवन , हवाएँ   कभी   इतनी   ख़ुशनुमा   न   थी , किसे   पता   था , ऐसा   कुछ   हो   जाएगा , रोशन   रोशन   सारा   जहाँ   हो   जाएगा , छोटा   सा   जुगनू   सूरज   बन   जाएगा , फूल   खिलेंगें   दिल   में   ही   नही ,  राहों   में आशा   बन   कोई   बहार   सी   नई   लाएगा , कोई   आएगा   और   दिल ...