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सोच मेरी

लगता   है   तुम्हें   कि   थोड़ी   अलग   है   सोच   मेरी   हाँ   मानती   हूँ ,  चीजों   को   देखने   का   नज़रिया   अलग   है   थोड़ा   मेरा , तुम्हें   तकलीफ़   है   विरोध   के   हर   तरीक़े   से   मेरे , मानते   हो   तुम   कि   अन्य   स्त्रियों   की   तरह   आवाज़   रहे   हमेशा   धीमी   मेरी और   स्त्रियों   की   तरह   सहनशक्ति   बड़ी   हो   मेरी , कैसे   सोचा   तुमने ? जो   राय   होगी   तुम्हारी   वही   होगी   मेरी , तुम्हारे   दिए   या   बनाए   फ़्रेम   में   जड़ी   हो   तस्वीर   मेरी , या   ढल   जाए   तुम्हारी   मर्ज़ी   के   साँचे   में   मर्ज़ी   मेरी , कैसे   सोचा   तुमने ? जो   तुम ...

वो एहसास

वो एहसास कि ख़ास हो तुम, वो एहसास कि मेरे आसपास हो तुम, ज़िंदगी की भागदौड़ में, एक सकूँ भरा विश्राम हो तुम, थक कर हो जाऊँ चूर तपती दोपहरी में तब ठंडक भरा आराम हो तुम बड़ा प्यारा वो अहसास कि आसपास हो तुम, वो एहसास कि ख़ास हो तुम, यक़ीं सा है कि मेरी चाहत हो तुम, भरोसा है कि मेरी राहत हो तुम , परेशानियों की दस्तक में, ख़ुशियों भरी आहट हो तुम, ज़िंदगी की बेबस बंदिशों को, अनायास ही मिल जाए वो इजाज़त हो तुम, बड़ा प्यारा वो एहसास कि आसपास हो तुम, वो एहसास कि ख़ास हो तुम, मेरे ख़्वाबों के ज़हाँ का एक अक्स हो तुम, हाँ, प्यार है जिससे मुझे, अनदेखे,अनजाने से वो शख़्स हो तुम, सुबह की पहली दुआ और शाम की आज़ान हो तुम, जो है अधूरा और शायद रहेगा भी अधूरा, मेरे हृदय में छुपा वो अरमान हो तुम, बड़ा प्यारा है वो एहसास कि आसपास हो तुम, वो एहसास कि ख़ास हो तुम....